मिडिल ईस्ट में जंग से भारत में महंगाई का नया दौर—सोना, तेल और दाल के दामों में तेजी
ईरान पर इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका के हमलों के बाद हालात तेजी से बिगड़े हैं। तेहरान की जवाबी कार्रवाई ने पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा दिया है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के इस दौर में किसी एक क्षेत्र में शुरू हुआ संकट पूरी दुनिया को प्रभावित करता है और भारत भी इससे अछूता नहीं रहा […] The post मिडिल ईस्ट में जंग, भारत में महंगाई का झटका—सोना, तेल और दाल महंगे appeared first on Khabar Sansar News.
मिडिल ईस्ट में जंग से भारत में महंगाई का नया दौर—सोना, तेल और दाल के दामों में तेजी
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कम शब्दों में कहें तो, ईरान के खिलाफ इजरायल और अमेरिका के हमलों के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में संकट गहरा गया है, जिसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। महंगाई के कारण आम लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
तनाव भरे हालात और महंगाई का बढ़ता दबाव
ईरान पर इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका के हमलों के बाद परिस्थितियां तेजी से बिगड़ गई हैं। तेहरान द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में तनाव की स्थिति पैदा कर दी है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के इस समय में, किसी एक क्षेत्र में शुरू हुआ संकट सभी देशों को प्रभावित करता है और भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। युद्ध का सीधा प्रभाव महंगाई के रूप में आम जनता तक पहुंचने लगा है।
सोना-चांदी की कीमतें उच्चतम स्तर पर
युद्ध जैसे हालात में निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ते हैं, जिससे सोने और चांदी की कीमतों में तेज उछाल आया है। 1 मार्च 2026 को घरेलू बाजार में सोने की कीमतें लगभग 1.73 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गईं, जबकि चांदी भी 2.90 लाख रुपये प्रति किलो के आस-पास बिकी। हालाँकि, कुछ सत्रों में इन कीमतों में थोड़ी नरमी देखी गई है।
सिरेमिक उद्योग पर संकट का असर
जंग का प्रतिकूल प्रभाव भारत के सिरेमिक उद्योग पर भी पड़ा है। गुजरात के मोरबी में कई फैक्ट्रियां गैस की सप्लाई बाधित होने के कारण बंदी के कगार पर हैं। सिरेमिक उद्योग के लिए कच्चे माल को सुखाने और भट्टियों को चलाने हेतु प्रोपेन और नेचुरल गैस की आवश्यकता होती है, जिसकी आपूर्ति मुख्य रूप से खाड़ी क्षेत्र से होती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना
ईरान में सत्ता से जुड़ी घटनाओं और अमेरिकी हमलों के बाद परिस्थितियाँ और बिगड़ी हैं। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने से तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति में बाधा आई है। इसका सीधे तौर पर अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ाने पर प्रभाव पड़ा है।
खाने के तेल की कीमतों में वृद्धि
भारत, भले ही ईरान से सीधे खाद्य तेल का आयात नहीं करता हो, लेकिन देश की 60 प्रतिशत खाद्य तेल की जरूरतें आयात पर निर्भर हैं। पाम ऑयल, जो इंडोनेशिया और मलेशिया से आता है, और सोयाबीन तेल अर्जेंटीना तथा ब्राजील से आता है। युद्ध के चलते कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण सामान्यतः पाम और सोया ऑयल का बड़ा हिस्सा बायोफ्यूल में बदल दिया जाता है, जिससे कुकिंग ऑयल की उपलब्धता में कमी आती है और कीमतें बढ़ती हैं।
बीमा महंगा और समुद्री रास्ते जोखिम में
इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अमेरिका-ईरान के तनाव बढ़ने के कारण भारत में कुकिंग और क्रूड ऑयल बाजार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। 5 मार्च के बाद कई समुद्री बीमा कंपनियों ने इस क्षेत्र के लिए वॉर रिस्क कवरेज प्रदान करना बंद कर दिया है, जिससे जहाजों का संचालन महंगा और जोखिम भरा हो गया है।
सूखे मेवों की आपूर्ति पर संकट
ईरान और अफगानिस्तान से आने वाले पिस्ता, केसर, अंजीर और खुबानी जैसे सूखे मेवों की सप्लाई प्रभावित हो रही है। इसका प्रभाव बाजार में साफ देखा जा सकता है, जहां इनकी कीमतों में तेजी से वृद्धि हो रही है।
दाल और प्याज की कीमतें भी बढ़ी
भारत अरहर, उड़द और मसूर की दालों का आयात म्यांमार, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया से करता है। होर्मुज मार्ग में बाधा आने के कारण जहाजों को लंबी यात्रा करनी पड़ रही है और शिपिंग कंपनियों ने वॉर रिस्क सरचार्ज बढ़ा दिया है। इसके अलावा, युद्ध की स्थिति में स्टॉक जमा करने की आशंका से प्याज की मांग अचानक बढ़ गई है, जिससे इसकी कीमतों में इजाफा हुआ है।
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सही साक्ष्य और आंकड़ों के माध्यम से हमने इस गंभीर स्थिति का विश्लेषण किया है और इससे स्पष्ट है कि वैश्विक स्तर पर तनावों के कारण महंगाई का खतरा बढ़ रहा है, जिससे आम जनता को सीधे प्रभावित होना पड़ रहा है।
सभी के लिए एक प्रश्न है कि क्या हमें फिर से ऐसे हालात का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए? आगे क्या विकसित होगा, यह देखना होगा।
— दीक्षा शर्मा, Team PWC News
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