मुखिया का निधन: लोन जिम्मेदारी कौन लेगा? जानें कानून की व्यवस्था

परिवार के किसी सदस्य, विशेषकर मुखिया के निधन के बाद संपत्ति के बंटवारे के साथ एक बड़ा सवाल सामने आता है कि उनके नाम पर मौजूद लोन का क्या होगा। बहुत से लोग मानते हैं कि विरासत के साथ कर्ज भी उत्तराधिकारियों पर आ जाता है, जबकि भारतीय कानून इस विषय में अलग और स्पष्ट […] The post मुखिया की मौत के बाद लोन कौन चुकाएगा, जानिए कानून का पूरा नियम appeared first on Khabar Sansar News.

Jul 22, 2026 - 18:53
 63  13.6k
मुखिया का निधन: लोन जिम्मेदारी कौन लेगा? जानें कानून की व्यवस्था

मुखिया का निधन: लोन जिम्मेदारी कौन लेगा? जानें कानून की व्यवस्था

Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - PWC News

कम शब्दों में कहें तो, मुखिया की मृत्यु के बाद उनके द्वारा लिए गए लोन का निपटारा कैसे किया जाएगा, यह एक महत्वपूर्ण सवाल है। भारतीय कानून इस विषय में स्पष्ट दिशा-निर्देश प्रदान करता है, जो हमें समझने में मदद करते हैं कि कर्ज के भुगतान की जिम्मेदारी किस पर होती है।

जब परिवार के मुखिया, चाहे वह पिता हो या माता, का निधन होता है, तो उनके नाम पर जो भी लोन या कर्ज होते हैं, वे एक गंभीर मुद्दा बन जाते हैं। परिवार के सदस्यों को यह समझने की जरूरत है कि क्या यह कर्ज उनके उत्तराधिकारियों पर भी आ जाता है या नहीं। कई लोग यह मानते हैं कि विरासत के साथ कर्ज भी उत्तराधिकारियों को मिल जाता है, जबकि वास्तव में भारतीय कानून इसमें भिन्नता प्रस्तुत करता है।

स्व-अर्जित संपत्ति के वितरण से पहले देनदारियों का भुगतान

कानूनी प्रावधानों के अनुसार, माता-पिता की संपत्ति का बंटवारा उनकी मृत्यु के बाद उस संपत्ति से पहले की गई देनदारियों का निपटारा करने के बाद किया जाता है। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत, पत्नी, बच्चे और माता जैसे पहले श्रेणी के वारिसों को समान अधिकार प्राप्त होते हैं। यह आवश्यक है कि संपत्ति का वितरण करने से पहले मृतक के सभी कर्ज और देनदारियों का हिसाब किया जाए। कानून के तहत, सबसे पहले मृतक की संपत्ति से उसके कर्ज का भुगतान किया जाएगा, इसके बाद शेष संपत्ति को वारिसों के बीच बाँटा जाएगा।

असुरक्षित लोन में वारिसों की निजी संपत्ति की सुरक्षा

जब बात असुरक्षित कर्ज जैसे क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन की होती है, तो बैंकों का पहला प्रयास मृतक द्वारा छोड़ी गई संपत्ति से अपनी बकाया राशि वसूलने का होता है। यदि उपलब्ध संपत्ति बेचने के बाद भी कर्ज का पूरा भुगतान नहीं हो पाता, तो बैंक उत्तराधिकारियों की व्यक्तिगत संपत्ति या आय पर दावा नहीं कर सकता। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि कानून वारिसों की निजी संपत्ति को सुरक्षित रखता है, और उन्हें मृतक के कर्ज का भुगतान अपने जेब से नहीं करना पड़ता है।

होम लोन और कार लोन के मामले में नियम अलग

वहीं, जब बात होम लोन और कार लोन जैसे सुरक्षित कर्जों की होती है, तो उस संपत्ति के अधिकार बैंक के पास गिरवी रहते हैं। यदि उधारकर्ता का निधन हो जाता है और लोन की किश्तें चुकता नहीं की जातीं, तो बैंक गिरवी संपत्ति की नीलामी करके अपना बकाया वसूलने की प्रक्रिया अपनाता है। अगर उत्तराधिकारी उस संपत्ति को अपने पास रखना चाहते हैं, तो उन्हें शेष कर्ज का भुगतान या नियमित रूप से ईएमआई चुकानी होगी।

गारंटर और सह-आवेदक की स्थिति

कर्ज के मामलों में गारंटर और सह-आवेदक की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी परिवार के सदस्य ने लोन लेते समय सह-आवेदक या गारंटर के रूप में अपनी भूमिका को स्वीकार किया है, तो वह कानूनन अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता। इस स्थिति में, उस व्यक्ति पर लोन चुकाने की वैधानिक जिम्मेदारी बनी रहती है।

अंततः, यह जानना आवश्यक है कि किसी भी कर्ज का निपटारा करने के दौरान सही कानूनी जानकारी होना महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही, परिवार के सदस्यों को भी इस प्रक्रिया के दौरान कानूनी मार्गदर्शन लेना चाहिए, ताकि किसी भी अनावश्यक कानूनी जटिलताओं से बचा जा सके।

इस विषय पर अधिक जानकरी के लिए आप PWC News का दौरा कर सकते हैं।

टिप्पणी: इस जानकारी का उपयोग व्यक्तिगत सलाह के रूप में नहीं किया जाना चाहिए; हमेशा एक विशेषज्ञ से सलाह लें।

टीम PWC News
राधा शर्मा

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow