राहुल गांधी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली राहत, FIR की मांग खारिज

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शुक्रवार (1 मई, 2026) को अदालत ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। यह याचिका राहुल गांधी के उस बयान को लेकर दायर की गई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी लड़ाई भारतीय […] The post इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहुल गांधी पर FIR की मांग खारिज की, बयान पर राहत appeared first on Khabar Sansar News.

May 2, 2026 - 09:53
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राहुल गांधी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली राहत, FIR की मांग खारिज

राहुल गांधी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली राहत, FIR की मांग खारिज

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कम शब्दों में कहें तो, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर की मांग को खारिज कर दिया है।

हाल ही में, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी को बड़ी राहत प्रदान की। शुक्रवार, 1 मई, 2026 को अदालत ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। याचिका राहुल गांधी के उस विवादास्पद बयान को लेकर दायर की गई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी लड़ाई केवल भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के खिलाफ नहीं, बल्कि "इंडियन स्टेट" के खिलाफ भी है।

हिंदू शक्ति दल की याचिका खारिज

यह याचिका हिंदू शक्ति दल की सदस्य सिमरन गुप्ता द्वारा दाखिल की गई थी। याचिका में यह दावा किया गया कि राहुल गांधी का बयान देश की जनभावनाओं के खिलाफ है और इसे राष्ट्रविरोधी टिप्पणी के रूप में देखा जाना चाहिए। यह मामला जस्टिस विक्रम डी. चौहान की एकल पीठ में सुना गया। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका को खारिज कर दिया।

किस बयान पर उठा था विवाद?

दिव्य दस्तावेज़ों के अनुसार, यह विवाद पिछले साल जनवरी में नई दिल्ली में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के नए मुख्यालय के उद्घाटन के दौरान राहुल गांधी के भाषण से शुरू हुआ। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस की लड़ाई अब केवल बीजेपी और आरएसएस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय राज्य की उस व्यवस्था के खिलाफ भी है, जिसे वह संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ मानते हैं। इस बयान के बाद, राष्ट्रव्यापी राजनीतिक बहस चल निकली।

याचिकाकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप

याचिकाकर्ता ने अदालत में आरोप लगाया कि राहुल गांधी का यह बयान न केवल राजनीतिक आलोचना है, बल्कि यह भारतीय राज्य की छवि को नुकसान पहुँचाने और देश में अस्थिरता फैलाने का प्रयास है। इससे पहले, संभल की स्थानीय अदालत में भी उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की गई थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। पुनरावृत्ति याचिका भी अस्वीकार होने के बाद मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा।

बीजेपी ने जताई थी कड़ी आपत्ति

राहुल गांधी के बयान पर बीजेपी ने कड़ी आपत्ति जताई थी। पूर्व भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने कहा कि यह बयान कांग्रेस की वैचारिक सोच को उजागर करता है और राष्ट्रहित के खिलाफ मानसिकता का प्रदर्शन करता है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि इस तरह की टिप्पणियाँ भारत की संप्रभुता और संवैधानिक ढांचे को कमजोर करने का प्रयास हैं।

असम में भी दर्ज हुआ था मामला

गुवाहाटी में भी राहुल गांधी के इसी बयान के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पान बाजार थाने में उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 और 197(1)(डी) के तहत मामला पंजीकृत किया गया, जिसमें आरोप लगाया गया कि उनके बयान ने राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।

राजनीतिक बयानबाजी पर फिर छिड़ी बहस

इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद, राजनीतिक बयानबाजी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मुद्दे पर बहस और तेज हो गई है। कोर्ट के फैसले को कांग्रेस समर्थक राहत के तौर पर देख रहे हैं, जबकि विपक्षी दल इसके राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा मानते हैं।

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लेखक: प्रिया शर्मा, Team PWC News

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