लाल बहादुर शास्त्री की गुजारिश के लिए मनोज कुमार ने बेचा था अपना घर, फिर सोने की तरह तप के निकली ये क्लासिक फिल्म
मनोज कुमार के निधन पर देश उन्हें याद कर रहा है। आज उनसे जुड़ा एक ऐसा किस्सा आपको सुनाते हैं जो कभी किसी एक्टर ने नहीं किया। लाल बहादुर शास्त्री की एक गुजारिश को पूरा करने के लिए मनोज कुमार ने अपना घर बेच दिया था।

लाल बहादुर शास्त्री की गुजारिश के लिए मनोज कुमार ने बेचा था अपना घर
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की शख्सियत और उनकी प्रेरणादायक कहानी ने न सिर्फ देश को, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री को भी काफी प्रभावित किया है। मनोज कुमार, जो कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के एक प्रख्यात अभिनेता और निर्देशक हैं, ने शास्त्री जी की इच्छा को पूरा करने के लिए अपने घर को बेचने का साहसिक कदम उठाया था। यह कहानी यकीनन किसी अच्छे फिल्म के रूप में दर्शकों के सामने आती है।
मनोज कुमार का संकल्प
मनोज कुमार ने अपने करियर की शुरुआत से ही ऐसे विषयों पर काम किया है, जो भारतीयता का प्रदर्शन करते हैं। जब शास्त्री जी ने 'जय जवान, जय किसान' का संदेश दिया था, तब मनोज कुमार ने इसे अपनी फिल्म के माध्यम से जीवित रखने का निर्णय लिया। वह चाहते थे कि इस संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाया जाए।
गृह बेचना और फिल्म निर्माण
अपने संकल्प को निभाने के लिए, मनोज कुमार ने अपने घर को बेचने का निर्णय लिया। उन्होंने महसूस किया कि यदि वह अपने सपने को पूरा करना चाहते हैं, तो इसके लिए आर्थिक स्वतंत्रता जरूरी है। इस तरह, उन्होंने अपने सारे संसाधनों को अपने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में निवेश किया। यह फिल्म 'गाइड' के बाद एक क्लासिक बन गई, जिसका टाइटल 'क्रांति' था।
क्लासिक फिल्म का निर्माण
मनोज कुमार की मेहनत रंग लाई और 'क्रांति' फिल्म ने दर्शकों का दिल जीत लिया। यह फिल्म न केवल मनोरंजक थी, बल्कि इसमें अहम सामाजिक संदेश भी दिया गया था। फिल्म ने भारतीय सिनेमा में एक नया अध्याय शुरू किया और आज भी इसे भारतीय सिनेमा की एक अहम कड़ी माना जाता है।
संदेश और विरासत
लाल बहादुर शास्त्री की यह गुजारिश आज भी बनी हुई है और मनोज कुमार की यह फिल्म न केवल एक क्लासिक है, बल्कि यह दर्शकों को प्रेरित भी करती है। उनके सम्पूर्ण करियर के दौरान, उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को उठाया है, जो देश के विकास की दिशा में सहायक रहे हैं।
समाप्ति में, मनोज कुमार का बलिदान और उनकी प्रतिभा ने भारतीय सिनेमा को एक नई पहचान दी। यह कहानी न केवल हमारे पूर्व प्रधानमंत्रियों के प्रति सम्मान प्रकट करती है, बल्कि यह हमारी सामाजिक जिम्मेदारी को भी रेखांकित करती है।
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