संसद में FCRA बिल पर उठा सस्पेंस, सरकार और विपक्ष में तकरार

संसद में FCRA बिल पर बढ़ा सस्पेंस, सरकार और विपक्ष आमने-सामने जी, हां केंद्र और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बनने के कारण गुरुवार को संसद में ‘फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026’ पेश किए जाने की संभावना कम बताई जा रही है। सरकार का कहना है कि वह बिल को हंगामे के बजाय सभी […] The post संसद में FCRA बिल पर बढ़ा सस्पेंस, सरकार और विपक्ष आमने-सामने appeared first on Khabar Sansar News.

Aug 6, 2026 - 18:53
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संसद में FCRA बिल पर उठा सस्पेंस, सरकार और विपक्ष में तकरार

संसद में FCRA बिल पर उठा सस्पेंस, सरकार और विपक्ष में तकरार

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कम शब्दों में कहें तो, भारतीय संसद में ‘फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026’ को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच गंभीर मतभेद उभरकर सामने आए हैं। यह बिल गुरुवार को पेश होने की संभावना कम दिख रही है। सरकार का कहना है कि वह हंगामे के बजाय सभी पक्षों से सहयोग देकर इस बिल पर चर्चा करना चाहती है।

संसद में बिल पेश होने पर क्यों बना संशय?

सरकारी सूत्रों के अनुसार, संसद में FCRA बिल पेश करने का निर्णय असंदिग्ध है क्योंकि केंद्र और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बन पाई है। विपक्ष ने इस मांग पर अड़ा हुआ है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को दिल्ली में NEET प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर लोकसभा में बयान देना चाहिए। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह केवल तभी इस बिल को लोकसभा में पेश करेगी जब सभी तथ्य सदन के सामने रखे जाएं और उस पर गहन बहस की जाए। सरकार का उद्देश्य हंगामे से बचना और सभी पक्षों से सहयोग पाना है।

विपक्ष से सहयोग की कोशिश, लेकिन विश्वास का अभाव

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा के विपक्षी नेता राहुल गांधी से चर्चा की ताकि संसद के मौन सत्र का संचालन सुचारू बने। यह पिछले 10 दिनों में राहुल गांधी से कीरजी की दूसरी मुलाकात थी। लेकिन, राहुल ने इस दौरान विश्वास दिलाने में असफल रहे, जबकि कांग्रेस के नेता इसे एक ‘कठोर कानून’ मानते हैं और इसे मौजूदा रूप में पास नहीं होने देने की ठान चुके हैं।

FCRA संशोधन में क्या है प्रस्तावित?

FCRA एक्ट का मूल उद्देश्य यह निर्धारित करना है कि भारतीय नागरिक, NGOs, ट्रस्ट, एसोसिएशन और कंपनियाँ विदेशी फंडिंग का उपयोग कैसे कर सकती हैं। यह कानून कुछ विशेष गतिविधियों पर नियंत्रण करता है, जो भारत की संप्रभुता, सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं। संशोधन में यह प्रस्तावित किया गया है कि रजिस्ट्रेशन खत्म होने या रद्द होने पर विदेशी फंडिंग से बनी संपत्तियों की सुरक्षा के लिए एक निश्चित प्राधिकरण बनाया जाएगा। नया नियम यह ध्यान में रखा गया है कि रजिस्ट्रेशन को केवल निर्धारित उद्देश्यों और मंजूर राज्यों से जोड़ा जाए।

विपक्ष ने संशोधन पर क्या जताई आपत्ति?

विपक्षी दलों का कहना है कि यह संशोधन सरकार की शक्तियों को बढ़ा सकता है, जिससे उसे NGOs की संपत्तियों को जब्त करने की अनुमति मिल सकती है। उनका यह भी मानना है कि इससे NGOs एवं अन्य संस्थाएं कमजोर पड़ सकती हैं, जिसका प्रभाव उन शैक्षणिक, धर्मार्थ और धार्मिक संस्थानों पर पड़ेगा जिनका जीवन विदेशी चंदे पर निर्भर है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पत्रकारों से कहा कि यह तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता कि एक संगठन (RSS) कुछ भी कर सकता है जबकि अन्य NGOs को इसकी अनुमति नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस ‘कठोर’ बिल का विरोध करेगी।


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यह लेख टीम PWC News द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें भारतीय महिला समर्पण के साथ प्रस्तुत किया गया है।

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