क्या नीलामी विज्ञापन की 30 दिन पूर्व सूचना न देना धनंजय गिरी के लिए हाईकोर्ट में बना सुरक्षा कवच?
खबर संसार नैनीताल.तो क्या नियमानुसार 30 दिन पूर्व अखबार में नीलामी का विज्ञापन न छपना, धनंजय का कवच बना हाईकोर्ट में!जी हा हल्द्वानी के चर्चित ठेकेदार धनजय गिरी जो लगातार मुसीवत में फसता दिख रहा को थोड़ी राहत मिलती दिख रही है कारण कानूनी पेचीदगी का अनुपालन न करने के कारण, साथ ही कुछ मामलों […] The post तो क्या नियमानुसार 30 दिन पूर्व अखबार में नीलामी का विज्ञापन न छपना, धनंजय का कवच बना हाईकोर्ट में! appeared first on Khabar Sansar News.
क्या नीलामी विज्ञापन की 30 दिन पूर्व सूचना न देना धनंजय गिरी के लिए हाईकोर्ट में बना सुरक्षा कवच?
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कम शब्दों में कहें तो, हल्द्वानी के ठेकेदार धनंजय गिरी को हाईकोर्ट से थोड़ी राहत मिली है, क्योंकि नीलामी से पहले कानूनी प्रक्रियाओं का पालन न करने के चलते उनकी भूमि की नीलामी पर रोक लगा दी गई है।
हल्द्वानी के चर्चित ठेकेदार धनंजय गिरी, जो लगातार विभिन्न कानूनी जटिलताओं में उलझे हुए हैं, अब कुछ राहत महसूस कर सकते हैं। उन्हें हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से गिरफ्तारी पर रोक का आदेश मिला था, और अब हाईकोर्ट ने भी उन्हें एक महत्वपूर्ण केस में राहत दी है। असल में, धनंजय गिरी की हल्द्वानी में स्थित भूमि की नीलामी के संबंध में हाईकोर्ट ने कार्यवाही पर रोक लगा दी है।
किस तरह हुई नीलामी प्रक्रिया में अनियमितताएँ?
धनंजय गिरी ने चंपावत के चलथी में पुल निर्माण के लिए नरेंद्र देव ज्वाइंट वेंचर के तहत ठेका लिया था। निर्माण में कुछ समस्याओं के कारण, निर्माण संस्था ब्रीडकुल ने डीएम नैनीताल को 3 करोड़ की वसूली का डिमांड नोटिस भेजा। जबकि धनंजय का कहना है कि उनकी 3 करोड़ की बैंक गारंटी पहले से ब्रीडकुल के पास है।
इसके अलावा, धनंजय ने यह भी केंद्रित किया कि निर्माण कार्य पूरी तरह से समय पर संपन्न नहीं हो पाया क्योंकि मौके पर प्लांट लगाने के लिए उचित अनुमतियाँ समय से नहीं मिल पाईं।
नीलामी विज्ञापन की तिथि का विवाद
26 दिसंबर 2025 को एसडीएम हल्द्वानी राहुल साह द्वारा धनंजय गिरी की भूमि की नीलामी का आदेश दिए जाने के बाद, नीलामी की तिथि को 27 जनवरी निर्धारित किया गया था। लेकिन धनंजय ने आरोप लगाया कि नीलामी की सूचना अखबार में 16 जनवरी को प्रकाशित की गई थी, जो कि नियमानुसार नीलामी की तिथि से 30 दिन पूर्व होनी चाहिए थी।
इसके अलावा, धनंजय ने यह भी कहा कि ब्रीडकुल के साथ मध्यस्थता का प्रावधान था और उनकी आपत्तियों की सही से सुनवाई किए बिना वसूली करना गलत था। न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकल पीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद 27 दिसंबर को नीलामी प्रक्रिया पर रोक लगा दी।
क्या आगे की कार्रवाई होगी?
अब देखना यह है कि अगली सुनवाई 16 फरवरी को होने वाली है, जहां अदालत फिर से सभी कानूनी पहलुओं पर विचार करेगी। दूसरी ओर, पुलिस भी धनंजय गिरी के रिकॉर्ड खंगाल रही है, जिससे यह प्रतीत होता है कि उनके खिलाफ कई अन्य मामले भी चल रहे हैं।
हालांकि, यह मामला न्यूजपोर्टल पर चल रहा है और ऐसे में धनंजय गिरी के भविष्य को लेकर लोगों में जिज्ञासा बनी हुई है। इस मामले पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया भी तेजी से आ रही है, जिससे साफ है कि यह हल्द्वानी का एक महत्त्वपूर्ण कानूनी मामला बन गया है।
उनकी भूमि की नीलामी के संबंध में जितनी कानूनी जटिलताएँ हैं, उतने ही लोग यह सोच रहे हैं कि आगे का परिणाम क्या होगा।
फिलहाल, धनंजय गिरी के बचाव में बढ़े हुए कानूनी कारवाइयों ने उन्हें एक दिशा दी है, और अब देखना है कि क्या वह अपने खिलाफ चल रही कानूनी चुनौतियों को पार कर पाएंगे।
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सादर,
टीम PWC न्यूज़
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