चुनाव आयोग की स्वतंत्रता: दिखावा भी उतना ही आवश्यक
खबर संसार नई दिल्ली.चुनाव आयोग का सिर्फ स्वतंत्रत होना ही काफ़ी नहीं है! स्वतंत्र दिखना भी चहिये,ये सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी है जब वो 2023 में संवेधानिक वैधता को चुनौती देने वाली 6 याचिकायों की सुनवाई कर रही थी जिसमे जस्टिस दीपांकर दत्ता और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ सुनवाई कर रही थी चुनाव आयोग […] The post चुनाव आयोग का सिर्फ स्वतंत्रत होना ही काफ़ी नहीं है! स्वतंत्र दिखना भी चहिये appeared first on Khabar Sansar News.
चुनाव आयोग की स्वतंत्रता: दिखावा भी उतना ही आवश्यक
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कम शब्दों में कहें तो, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि चुनाव आयोग का केवल स्वतंत्र होना ही काफी नहीं है, इसे स्वतंत्रता की छवि भी पेश करनी चाहिए। यह टिप्पणी 2023 में संविधान की वैधता से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान की गई, जिसमें जस्टिस दीपांकर दत्ता और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ सुनवाई कर रही थी।
हाल ही में, चुनाव आयोग की नियक्ति प्रक्रिया पर एक नया नियम लागू हुआ है, जिसके अनुसार चुनाव आयोग का चयन एक विपक्षी नेता, एक प्रधानमंत्री और एक तटस्थ व्यक्ति द्वारा किया जाएगा। लेकिन यदि हम 2023 के नए कानून को देखें, तो इसमें प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त कैबिनेट मंत्री और एक विपक्षी नेता का होना न केवल प्रक्रियात्मक है, बल्कि इससे निष्पक्षता का सवाल उठता है। क्या यह संभव है कि ऐसी चयन समिति में सही मायने में निष्पक्षता कायम रखी जा सके?
हमारे लोकतंत्र की नींव है स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों पर विश्वास। यदि चुनाव आयोग के चयन की प्रक्रिया में कोई तटस्थ पक्ष नहीं है, तो जनता का लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर विश्वास कमजोर होगा। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस भी चुनाव आयोग की चयन समिति के सदस्य थे, जो कि एक संतुलन बनाते थे।
आधुनिक लोकतंत्र के लिए आवश्यक है कि चुनाव आयोग न केवल स्वतंत्र हो बल्कि अपनी स्वतंत्रता की छवि भी बनाए। ऐसे में, एक तटस्थ सदस्य की उपस्थिति सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि लोकतंत्र की स्वच्छता बनी रहे। इससे चुनाव आयोग की वैधता और जनता का विश्वास दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
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समापन करते हुए, यह कहना उचित होगा कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता की धारणा को मजबूत करना लोकतंत्र के लिए अत्यंत आवश्यक है। इससे लोकतंत्र में जनता का विश्वास बढ़ेगा।
सादर,
टीम PWC News
सीमा शर्मा
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