'नाबालिग लड़की के स्तनों को पकड़ना रेप या उसके प्रयास में नहीं आता', इलाहाबाद HC के इस फैसले पर SC ने लगाई रोक
नाबालिग लड़की को लेकर किए गए इलाहाबाद HC के एक फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार और केन्द्र सरकार को नोटिस जारी किया।

इलाहाबाद HC के फैसले पर SC ने लगाई रोक: 'नाबालिग लड़की के स्तनों को पकड़ना रेप या उसके प्रयास में नहीं आता'
हाल ही में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए एक विवादास्पद फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। इस फैसले में अदालत ने कहा था कि 'नाबालिग लड़की के स्तनों को पकड़ना रेप या उसके प्रयास में नहीं आता।' यह फैसला समाज में बड़े पैमाने पर बहस और विरोध का कारण बना है। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस पर हस्तक्षेप करने का निर्णय लिया है, जो कि कानून और नाबालिगों के अधिकारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
सुप्रीम कोर्ट के इस हस्तक्षेप से यह साफ होता है कि नाबालिगों के प्रति कानून का पालन करने में कोई ढील नहीं दी जाएगी। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में नाबालिगों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। ऐसा कोई भी फैसला जो उनके अधिकारों को प्रभावित करता है, उसे सबसे पहले विचार किया जाना चाहिए।
समाज पर नकारात्मक प्रभाव
इस तरह के फैसले से समाज में नाबालिगों के प्रति संवेदनशीलता कम होती है। जब अदालतें इस प्रकार के विचार पेश करती हैं, तो यह संकेत मिलता है कि नाबालिगों की सुरक्षा के लिए कानून कितनी दूर तक पहुंच रहा है। यह जरूरी है कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और समझदारी से निपटा जाए।
अधिकारों की रक्षा
नाबालिगों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए यह जरूरी है कि कानून की व्याख्या सावधानीपूर्वक की जाए। सुप्रीम कोर्ट का यह कदम एक सकारात्मक संकेत है कि न्यायालय नाबालिगों के अधिकारों को प्राथमिकता दे रहा है। इसके अलावा, समाज को भी चाहिए कि वे नाबालिगों के प्रति सम्मान और सुरक्षा की भावना को बनाए रखें।
इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट द्वारा दाखिल की गई रोक न केवल न्यायिक प्रणाली के लिए, बल्कि समाज के नैतिक मूल्यों के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला है।
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