उत्तराखंड प्रबंध समिति से सवाल: बुल्लेशाह का पाकिस्तान से मसूरी तक सफर कैसे संभव हुआ?

खबर संसार देहरादून.उत्तराखंड प्रबंध समिति क्यों नहीं बताती, बुल्लेशाह पाकिस्तान में दफना दिए हुए,फिर मसूरी में कैसे पहुंचे? मसूरी बुल्लेशाह मजार प्रकरण, उर्स के बहाने होती है लाखों की चंदा वसूली. जी हाbदेहरादूनमसूरी स्थित जंगल के बीच बनी बुल्लेशाह की अवैध मजार सुर्खियों में है, खास बात ये है उक्त मजार को बुल्लेशाह की मजार […] The post उत्तराखंड प्रबंध समिति क्यों नहीं बताती, बुल्लेशाह पाकिस्तान में दफना दिए हुए,फिर मसूरी में कैसे पहुंचे?  appeared first on Khabar Sansar News.

Feb 10, 2026 - 09:53
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उत्तराखंड प्रबंध समिति से सवाल: बुल्लेशाह का पाकिस्तान से मसूरी तक सफर कैसे संभव हुआ?

उत्तराखंड प्रबंध समिति से सवाल: बुल्लेशाह का पाकिस्तान से मसूरी तक सफर कैसे संभव हुआ?

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कम शब्दों में कहें तो, मसूरी की बुल्लेशाह मजार में चल रही चंदा वसूली पर उठ रहे सवालों ने एक बार फिर ध्यान खींचा है। क्या आपको मालूम है कि बुल्लेशाह, जो पाकिस्तान में दफनाए गए थे, उनकी मजार मसूरी में कैसे बनी? आइए जानते हैं इस मामले की गहराई।

हाल ही में, देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम में उत्तराखंड प्रबंध समिति पर सवाल उठाया गया। मसूरी की जंगली इलाके में बनी अवैध मजार, जिसे बुल्लेशाह की मजार कहा जा रहा है, के पीछे की सच्चाई आज की चर्चा का विषय बनी हुई है। इस मजार के खादिमों द्वारा लाखों का चंदा वसूला जा रहा है, लेकिन इसके लिए किसी भी प्रकार का खाता या हिसाब सार्वजनिक नहीं किया गया है। यह एक बड़ा सवाल है कि प्रबंध समिति अब तक ये नहीं बता पाई है कि बुल्लेशाह पाकिस्तान से मसूरी कैसे पहुंचे।

बुल्लेशाह का इतिहास और वर्तमान संदर्भ

दरअसल बाबा बुल्लेशाह नाम का एक ही फकीर सूफी कवि थे जोकि पाकिस्तान में दफनाए गए थे।

बाबा बुल्लेशाह, जोकि सूफी कविताओं के लिए मशहूर थे, उन्हें एक नास्तिक माना जाता है। उनकी कविताएं आज भी भारत और पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र में गाई जाती हैं। उनका एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक गुरु था लाहौर के सूफी मुर्शिद शाह इनायत कादिरी। बाबा बुल्लेशाह का जीवन प्रेम और मानवता के संदेश से भरा हुआ था, और उनकी कविताओं में ईश्वर से पहले प्रेम को महत्व दिया गया है।

मसूरी में उनकी मजार का रहस्य

एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जब बुल्लेशाह पाकिस्तान के कसूर में दफनाए गए हैं, तो उनका नाम लेकर मसूरी में मजार कैसे बनी? यहां यह उल्लेख करना जरूरी है कि भारत में विशेष रूप से सूफियों की मजारें आमतौर पर एक निश्चित स्थान पर होती हैं। उदाहरण के लिए, पिरान कलियर की मजार, जो ख्वाजा गरीब नवाज की है, केवल एक ही स्थान पर स्थित है।

मसूरी में बनी मजार के आसपास कई अन्य अवैध मजारों का निर्माण भी हुआ है, लेकिन प्रबंध समिति ने इसके पीछे के कारणों का खुलासा नहीं किया है। ऐसी स्थिति में, यह चिंता बढ़ी है कि इस क्षेत्र में धार्मिक आस्था के नाम पर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है।

स्थानीय समुदाय की प्रतिक्रिया

हिंदुत्व निष्ठ संगठनों का कहना है कि प्रबंध समिति और उनके खादिम कालनेमि हैं जो समाज को गुमराह कर रहे हैं। हाल ही में, इस अवैध मजार के खिलाफ हिंदुत्वनिष्ठ कार्यकर्ताओं ने आंदोलन किया, जिसके चलते विवाद उत्पन्न हुआ। जिला प्रशासन ने इस मामले में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।

बजरंग दल के नेताओं का मत है कि ये अवैध मजारें लोगों को आस्था के नाम पर धोखा दे रही हैं। उनका कहना है कि अगर इस फर्जीवाड़े को रोका नहीं गया, तो देवभूमि की सांस्कृतिक धरोहर को खतरा हो सकता है।

निष्कर्ष

ये पूरा मामला उत्तराखंड प्रबंध समिति की भूमिका और जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है। क्या वास्तव में बुल्लेशाह की मजार जैसी स्थितियां धार्मिक आस्था के नाम पर समाज को गुमराह कर रही हैं? जब तक प्रबंध समिति इस सवाल का स्पष्ट और स्पष्ट उत्तर नहीं देती, तब तक मजारें विवाद का केंद्र बनी रहेंगी।

हमारे देश की सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण आवश्यक है और इसे स्थानीय समुदाय के सहयोग एवं समर्थन की आवश्यकता है।

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टीम PWC न्यूज, सुमन कुमारी

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