गुवाहाटी में ‘चार्मिंग असम’: असम की सांस्कृतिक विरासत पर अद्भुत पुस्तक का विमोचन

​गुवाहाटी/चम्पावत। असम की समृद्ध संस्कृति और ब्रह्मपुत्र की गौरवशाली विरासत को संजोए हुए लेखक डॉ. शरद चंद्र जोशी की नवीनतम

Feb 25, 2026 - 00:53
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गुवाहाटी में ‘चार्मिंग असम’: असम की सांस्कृतिक विरासत पर अद्भुत पुस्तक का विमोचन

गुवाहाटी में ‘चार्मिंग असम’: असम की सांस्कृतिक विरासत पर अद्भुत पुस्तक का विमोचन

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कम शब्दों में कहें तो, असम की समृद्ध संस्कृति और ब्रह्मपुत्र नदी की विशिष्टता पर आधारित पुस्तक ‘चार्मिंग असम: द लैंड ऑफ माइटी ब्रह्मपुत्र’ का भव्य विमोचन गुवाहाटी में हुआ। यह पुस्तक लेखक डॉ. शरद चंद्र जोशी द्वारा लिखी गई है, जिन्होंने अपने लेखन के माध्यम से असम की अद्भुत सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया है।

गुवाहाटी के होटल टोक्यो टॉवर में 23 फरवरी को आयोजित इस समारोह में अनेक प्रसिद्ध हस्तियों ने भाग लिया। विशेष रूप से नागालैंड विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. समुद्रगुप्त कश्यप और जाने-माने व्यक्तित्व बोलिन बोरदोलोई ने इस पुस्तक के विमोचन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

‘चार्मिंग असम’ की विशेषताएँ

इस पुस्तक में असम की सांस्कृतिक, पारंपरिक और शैक्षणिक धरोहर को उजागर किया गया है। डॉ. जोशी ने असम की विविधता, वहाँ के लोकाचार, त्योहारों और भारतीय संस्कृति में इसके योगदान को बारीकी से प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक न केवल असम के प्रति प्रेम को जगाती है बल्कि भारतीय संस्कृति के उन पहलुओं को भी उजागर करती है, जो बाकी राज्यों में आनंदित हो सकते हैं।

समारोह की झलकी

विमोचन समारोह में उपस्थित लोगों ने डॉ. जोशी की पुस्तक की सराहना की और विशेष रूप से असम की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. समुद्रगुप्त कश्यप ने कहा, “ये पुस्तक असम की संस्कृति की गहराई को समझने का अद्वितीय माध्यम है।” वहीं बोलिन बोरदोलोई ने पुस्तक को समृद्धि और ज्ञान का प्रतीक बताया।

असम की सांस्कृतिक विरासत

असम एक ऐसा राज्य है जहाँ की विविधता में एकता का अद्भुत उदाहरण है। यहाँ के पर्व, त्योहार, कला और कार्यशालाएँ असम की सांस्कृतिक धरोहर को और भी प्रगल्भ बनाते हैं। ‘चार्मिंग असम’ पुस्तक इस बात का प्रमाण है कि कैसे एक क्षेत्रीय धरोहर को सहेजकर रखने की आवश्यकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इससे प्रेरित हो सकें।

निष्कर्ष

‘चार्मिंग असम’ न केवल एक पुस्तक है, बल्कि यह असम की आत्मा को समझने का एक साधन है। यह पुस्तक पाठकों को असम के रंग-बिरंगे लोकजीवन और उसके विविध सांस्कृतिक पहलुओं से परिचित कराएगी। डॉ. शरद चंद्र जोशी द्वारा की गई इस अद्वितीय पहल निश्चित रूप से हमारे देश की संस्कृति को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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सादर, टीम PWC न्यूज़ - प्रिया गुप्ता

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