चम्पावत: सीएम धामी ने किया कला और संस्कृति के संरक्षण के लिए कलश कला समिति के होली महोत्सव का उद्घाटन
चम्पावत। काली कुमाऊं की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं पारंपरिक लोक कला के संरक्षण के उद्देश्य से कलश कला समिति की
चम्पावत: मुख्यमंत्री धामी का होली महोत्सव में योगदान
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कम शब्दों में कहें तो, काली कुमाऊं की सांस्कृतिक धरोहर को बचाने के उद्देश्य से आयोजित होली महोत्सव का सुरूआत हो गई है।
चम्पावत। काली कुमाऊं की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं पारंपरिक लोक कला के संरक्षण के लक्ष्य के साथ कलश कला समिति ने एक भव्य होली महोत्सव का आयोजन किया है। इस महोत्सव का उद्घाटन मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्चुअल माध्यम से किया। यह दो दिवसीय उत्सव जनपद मुख्यालय स्थित दीवान सिंह लडवाल स्टेडियम में दीप प्रज्वलन के साथ प्रारंभ हुआ।
मुख्यमंत्री का संबोधन
मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में कहा कि काली कुमाऊं की लोक कला अब केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना रही है। उन्होंने इस महोत्सव के माध्यम से सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। उनके अनुसार, इस प्रकार के आयोजनों से न केवल हमारी परंपरा को मजबूत किया जा सकता है, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का अवसर मिलता है।
महोत्सव की विशेषताएँ
उत्सव में काली कुमाऊं की लोक कला, संगीत, नृत्य और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रदर्शन किया जाएगा। कलाकार अपने अद्वितीय कौशल के माध्यम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे। इस महोत्सव में स्थानीय कारीगरों और कलाकारों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है, जिससे वे अपनी कला का प्रदर्शन कर सकें। यह महोत्सव केवल खुशी का अवसर नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर की पहचान भी है।
इस महोत्सव में शामिल होने वाले सभी आगंतुकों को अपनी सांस्कृतिक शिक्षा को बढ़ाने और स्थानीय कला के प्रति जागरूकता बढ़ाने का मौका मिलेगा। अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
निष्कर्ष
इस प्रकार, कलश कला समिति का यह होली महोत्सव न केवल सांस्कृतिक संरक्षण का प्रतीक है, बल्कि यह सामाजिक एकता और विविधता को भी बढ़ावा देने का एक प्रयास है। मुख्यमंत्री धामी की पहल और समर्थन से इस महोत्सव में स्थानीय समुदाय का योगदान अनिवार्य होगा, जो संस्कृति के संवर्धन में सहायक होगा।
इस महोत्सव के माध्यम से हम सभी को एक नई प्रेरणा मिलेगी कि हम अपनी सांस्कृतिक धरोहर को बचाने के लिए किस प्रकार से योगदान कर सकते हैं।
टीम PWC News - राधिका शर्मा
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