समाज की शक्ति से राष्ट्र की रक्षा, मोहन भागवत का महत्वपूर्ण संबोधन
खबर संसार देहरादून समाज सशक्त होगा तो राष्ट्र रक्षा भी अजेय होगी — पूर्व सैनिक संवाद गोष्ठी में बोले सरसंघचालक मोहन भागवत जी .राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक माननीय डॉ. मोहन भागवत जी के उत्तराखंड प्रवास के द्वितीय दिवस पर आज देहरादून के निम्बूवाला स्थित हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र, गढ़ी कैंट में पूर्व सैनिकों एवं पूर्व […] The post समाज सशक्त होगा तो राष्ट्र रक्षा भी अजेय होगी appeared first on Khabar Sansar News.
समाज की शक्ति से राष्ट्र की रक्षा, मोहन भागवत का महत्वपूर्ण संबोधन
Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - PWC News
कम शब्दों में कहें तो, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने उत्तराखंड के देहरादून में एक प्रेरणादायी गोष्ठी में यह कहा कि "समाज सशक्त होगा तो राष्ट्र रक्षा भी अजेय होगी।" इस अवसर पर उन्होंने पूर्व सैनिकों से संवाद करते हुए समाज और राष्ट्र की एकता एवं सशक्तता का महत्व स्पष्ट किया।
आज देहरादून के निम्बूवाला स्थित हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित इस संवाद गोष्ठी में थलसेना, नौसेना, ITBP, तटरक्षक बल तथा अन्य सैन्य क्षेत्रों से सेवानिवृत्त कई पूर्व सैनिक एवं अधिकारी शामिल हुए, जो अपने अनुभव साझा करने के लिए एकत्रित हुए थे।
भारतीय संस्कृति की गहराईयों में समाहित संदेश
अवसर पर जनरल गुलाब सिंह रावत, कर्नल अजय कोठियाल और कर्नल मयंक ने डॉ. भागवत का पारंपरिक सम्मान किया। इस गोष्ठी का संचालन प्रांत विशेष टोली संपर्क सदस्य राजेश सेठी जी ने किया। अपने ओजस्वी संबोधन में भागवत जी ने कहा कि "समाज का संगठित बल ही राष्ट्र की सशक्तता का आधार है।" उन्होंने हमारे इतिहास के विभिन्न पहलुओं को साझा करते हुए बताया कि अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष तभी सफल हुआ जब समाज एकजुट हुआ।
भागवत जी ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय वीरता और साहस का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा, "स्वतंत्रता की ज्योति कभी मंद नहीं पड़ी, भले ही तत्काल विजय नहीं मिली।" उन्होंने द्वितीय विश्वयुद्ध के संदर्भ में विंस्टन चर्चिल का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी इतिहास से सीख लेना आवश्यक है।
संघ का उद्देश्य समाज का संगठन और राष्ट्र का उत्थान
संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की राष्ट्रनिष्ठा का स्मरण करते हुए भागवत जी ने कहा कि वे स्वतंत्रता आंदोलन में निर्भीकता के साथ भागीदार थे। उन्होंने कहा कि "भारत की सांस्कृतिक विविधता हमारी ताकत है।" उनके अनुसार, "संघ का लक्ष्य केवल व्यक्ति का निर्माण करना है, क्योंकि जब व्यक्ति सुदृढ़ होता है, तब ही राष्ट्र सशक्त हो सकता है।"
भागवत जी ने यह भी उल्लेख किया कि "भारत की आत्मा विविधता में एकता है," और कहा कि हमें अपने ऋषियों की विश्व कल्याण की भावना को पुनः जागृत करने की आवश्यकता है।
पूर्व सैनिकों का महत्वपूर्ण योगदान
पूर्व सैनिकों को विशेष रूप से संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि "देश स्वतंत्र है, लेकिन उसकी स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सेना की आवश्यकता सदैव बनी रहती है।" समाज की रक्षा के लिए एक सशक्त रक्षा व्यवस्था का होना अनिवार्य है।
भागवत जी ने उपस्थित पूर्व सैनिकों से आह्वान किया कि वे संघ के शिविरों में शामिल होकर स्वयंसेवकों के कार्यों को समझें और अपनी क्षमता के अनुसार समाज सेवा में भाग लें। उन्होंने बताया कि संघ के देशभर में 1 लाख 30 हजार से अधिक सेवा प्रकल्प सक्रिय रूप से चल रहे हैं।
कार्यक्रम का समापन भागवत जी के संदेश के साथ हुआ कि "संघ नहीं, समाज के कारण देश बड़ा हुआ, यह संवाद का सार है।" अंत में, राष्ट्रीय गीत का भावपूर्ण गायन हुआ, जो इस प्रेरणादायक कार्यक्रम को समाप्त करता है।
इस कार्यक्रम में डॉ. मोहन भागवत का यह महत्वपूर्ण संदेश निश्चित रूप से समाज की शक्ति और एकता को उजागर करता है और हमें एक सशक्त राष्ट्र की दिशा में बढ़ने का मार्गदर्शन करता है।
अधिक जानकारी के लिए, यहाँ क्लिक करें.
सादर, टीम PWC News
नीता शर्मा
What's Your Reaction?