समाज के सशक्तिकरण से राष्ट्र की सुरक्षा को मिलेगी मजबूती: डॉ. मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक माननीय डॉ. मोहन भागवत के उत्तराखंड प्रवास के द्वितीय दिवस पर आज देहरादून के निम्बूवाला स्थित हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र, गढ़ी कैंट में पूर्व सैनिकों एवं पूर्व सेना अधिकारियों के साथ “प्रमुख जन गोष्ठी एवं विविध क्षेत्र समन्वित संवाद कार्यक्रम” सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के आरंभ में पूर्व मेजर जनरल गुलाब सिंह […] The post समाज मजबूत होगा तो राष्ट्र रक्षा सशक्त होगी: डॉ. मोहन भागवत appeared first on Uttarakhand News Update.

Feb 24, 2026 - 18:53
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समाज के सशक्तिकरण से राष्ट्र की सुरक्षा को मिलेगी मजबूती: डॉ. मोहन भागवत

समाज के सशक्तिकरण से राष्ट्र की सुरक्षा को मिलेगी मजबूती: डॉ. मोहन भागवत

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कम शब्दों में कहें तो, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने उत्तराखंड में एक कार्यक्रम के दौरान समाज की भूमिका को राष्ट्र की रक्षा में महत्वपूर्ण बताया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक माननीय डॉ. मोहन भागवत अपने उत्तराखंड प्रवास के दौरान तीसरे दिन देहरादून में हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र, गढ़ी कैंट में पूर्व सैनिकों और सेना के अधिकारियों के संग “प्रमुख जन गोष्ठी एवं विविध क्षेत्र समन्वित संवाद कार्यक्रम” का आयोजन किया। इस कार्यक्रम की शुरुआत में पूर्व मेजर जनरल गुलाब सिंह रावत, कर्नल अजय कोठियाल और कर्नल मयंक चौबे ने डॉ. भागवत का शाल ओढ़ाकर और पारंपरिक टोपी से सम्मानित किया। इस कार्यकम में छह जनरल, वाइस एडमिरल, डीजी कॉस्ट गार्ड, ब्रिगेडियर और 50 से अधिक कर्नल रैंक के अधिकारियों सहित सैकड़ों पूर्व सैनिकों ने भाग लिया। मंच संचालन का कार्य राजेश सेठी ने किया।

समाज की सशक्त भूमिका

डॉ. भागवत ने अपने उद्धबोधन में कहा कि “राष्ट्र के भाग्य निर्माण में समाज की केंद्रीय भूमिका होती है”। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि “समाज मजबूत होगा तो राष्ट्र की रक्षा भी सशक्त होगी।” उन्होंने यह भी कहा कि समाज का संगठित सामर्थ्य ही हर व्यक्ति को स्थिरता और बल प्रदान करता है। इसके लिए समाज के नेतृत्व में चरित्रवान और अनुशासित दृष्टिकोण होना आवश्यक है।

इतिहास से सीखने की आवश्यकता

उन्होंने 1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम से लेकर अनेक क्रांतिकारी आंदोलनों की विधियों का उदाहरण देते हुए कहा कि स्वतंत्रता की ज्योति कभी नहीं बुझी। द्वितीय विश्वयुद्ध के संदर्भ में विंस्टन चर्चिल की बातों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि इतिहास से सीख लेना एक परिपक्व राष्ट्रीय चेतना का उदाहरण है। डॉ. भागवत ने संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का भी जिक्र किया, जो स्वतंत्रता संग्राम के चर्चित नेताओं में से एक थे।

संघ का मुख्य उद्देश्य

डॉ. भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ का एकमात्र उद्देश्य व्यक्ति निर्माण करना है, चुनावी राजनीति करना नहीं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब व्यक्ति मजबूत होता है, तभी राष्ट्र भी मजबूत होता है। संघ ने बिना किसी बाहरी साधनों के अपने उद्देश्य की सिद्धि की है, और इसके बावजूद समाज की आत्मशक्ति के बल पर आगे बढ़ता गया है।

महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर

कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में, पूर्व सैनिकों और अधिकारियों ने विभिन्न विषयों, जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक समरसता और युवा पीढ़ी से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे। डॉ. भागवत ने सभी प्रश्नों का तार्किक और संतुलित उत्तर दिया। राष्ट्रीय सुरक्षा और अग्निवीर योजना पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट नेतृत्व और सैन्य तैयारी हमेशा आवश्यक हैं। उन्होंने अग्निवीर योजना को एक प्रयोग मानते हुए कहा कि इस पर अनुभव के तहत सुधार किया जाना चाहिए।

सामाजिक समरसता और हिंदू पहचान

हिंदू पहचान और सामाजिक समरसता पर उन्होंने कहा कि भारतीय दृष्टि जड़ और चेतन को समान मानती है और “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना इसका मूल है। उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि हिंदू विचार उदार और समावेशी है, और इस समाज में कोई भी व्यक्ति बिना किसी परिवर्तन के शामिल हो सकता है।

सोशल मीडिया और संवाद का महत्व

सोशल मीडिया पर वैचारिक कटुता के सवाल पर डॉ. भागवत ने कहा कि कटुता के स्थान पर सार्थक संवाद की परंपरा को पुनर्जीवित करना चाहिए। जमीनी स्तर पर संवाद और फीडबैक से नीतियों की कार्यक्षमता बढ़ाई जा सकती है।

भ्रष्टाचार और चरित्र निर्माण

भ्रष्टाचार और चरित्र निर्माण पर उन्होंने कहा कि यह केवल व्यवस्थागत नहीं, बल्कि “नियत” का मामला है। बच्चों में संस्कार विकसित करना, कमाई में बचत करना और समाज के लिए वितरण करना राष्ट्र निर्माण की सच्ची नींव है।

नरेंद्र की भलाई के लिए सुनियोजित प्रयास

युवा पीढ़ी, पलायन और स्थानीय विकास के मुद्दों पर, डॉ. भागवत ने शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय उद्यमिता के क्षेत्र में अपार संभावनाओं की बात की। गढ़वाल जैसे क्षेत्रों में पलायन रोकने के लिए विशेष योजनाएँ विकसित करने की आवश्यकता बताते हुए उन्होंने कहा कि इस दिशा में सुनियोजित प्रयास से ही सफलता प्राप्त की जा सकती है।

समान नागरिक संहिता और आरक्षण के मुद्दे

समान नागरिक संहिता (UCC) को उन्होंने राष्ट्रीय एकता का महत्वपूर्ण साधन बताया। उन्होंने कहा कि इससे समाज में विवादों को कम किया जा सकता है। आरक्षण की आवश्यकता के बारे में उन्होंने सहमति और धैर्य के महत्व को रेखांकित किया।

समाज की सेवा की आवश्यकता

डॉ. भागवत ने उपस्थित पूर्व सैनिकों से आग्रह किया कि सीमाओं पर लड़ने वाले सैनिकों के समान ही समाज में सेवा और संघर्ष की उतनी ही आवश्यकता है। उन्होंने संघ के 1 लाख 30 हजार से अधिक सेवा प्रकल्पों में शामिल होने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का समापन और संदेश

कार्यक्रम का समापन डॉ. भागवत के प्रेरणादायक शब्दों के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने कहा कि “संघ का उद्देश्य कभी प्रचार नहीं रहा।” समाज का संगठन और राष्ट्र का उत्थान ही उसकी प्रेरणा है। उन्होंने अंत में राष्ट्रगान के ओजस्वी गायन के साथ कार्यक्रम का समापन किया।

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सादर,

टीम PWC न्यूज़, राधिका शर्मा

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