बदरीनाथ में भगवान नर-नारायण की जयंती: श्रद्धा और उल्लास का पर्व
श्री बदरीनाथ धाम में रविवार को भगवान नर-नारायण की दो दिवसीय जयंती का पर्व श्रद्धा...
बदरीनाथ में भगवान नर-नारायण की जयंती: श्रद्धा और उल्लास का पर्व
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कम शब्दों में कहें तो, रविवार को श्री बदरीनाथ धाम में भगवान नर-नारायण की दो दिवसीय जयंती का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ शुरू हुआ।
श्री बदरीनाथ धाम में भगवान नर-नारायण की जयंती का उत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती की उपस्थिति में रावल अमरनाथ नंबूदरी ने भगवान नर-नारायण की उत्सव मूर्ति को देवडोली में विराजमान कर माता मूर्ति मंदिर के लिए भेजा। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना और अभिषेक का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।
विशेष कार्यक्रम और उत्सव की विशेषता
माता मूर्ति मंदिर पहुंचने पर महिला मंडल माणा ने पुष्पवर्षा के साथ भगवान की डोली का स्वागत किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान नर-नारायण के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूजा के बाद, देवडोली वापस बदरीनाथ धाम पहुंची, जहाँ श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन भी किया गया।
प्रमुख धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान नर और नारायण सतयुग से ही बदरीनाथ धाम में तपस्या कर रहे हैं। इन्हें भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है। बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ के मुताबिक, सोमवार को भगवान नर-नारायण बदरीविशाल के जन्मस्थल लीला ढूंगी पहुंचेंगे, जहां विशेष पूजा-अर्चना और अभिषेक किया जाएगा। इससे पहले, भगवान बामणी गांव तथा अन्य स्थलों का भ्रमण कर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देंगे।
धार्मिक महत्व और आस्था
भगवान नर-नारायण की जयंती को लेकर क्षेत्र में विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन का उत्सव पूरे क्षेत्र में एकत्रित श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था और भक्तिभाव का प्रतीक है। उपमुख्यमंत्री ऋषि प्रसाद सती ने इस पर्व को लेकर श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दी हैं और इस बात का आश्वासन दिया है कि मंदिर परिसर में सभी सुरक्षा मापदंडों का पालन किया जाएगा।
धार्मिक अनुष्ठान, विशेष पूजा-अर्चना, और भंडारे के आयोजनों से बदरीनाथ धाम की हरियाली और इसका धार्मिक महत्व बढ़ जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ ठिठरती ठंड में भी अपनी आस्था प्रकट करने के लिए उमड़ रही है।
भगवान नर-नारायण की जयंती के अवसर पर आयोजित इस पर्व का उत्साह न केवल मंदिर परिसर में, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी देखने को मिल रहा है। भक्तगण दूर-दूर से इस पावन स्थली पर पहुँच कर भगवान के दर्शन कर रहे हैं और अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहे हैं।
इस पर्व का आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को प्रकट करता है, बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को भी सहेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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टीम PWC News, साक्षी शर्मा
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