हल्द्वानी की रामलीला के मशहूर कलाकार शम्भू बाबा का निधन, 50 वर्षों तक बनाए रावण के पुतले

खबर संसार हल्द्वानी.हल्द्वानी की रामलीला में पिछले 50 सालों से रावण मेघनाथ कुम्भकरण के पुतले बनाने वाले शम्भू बाबा इस नश्वर संसार से विदा हो गए कल. जी हा ल्द्वानी के दशहरे को भव्य बनाने वाले शंभू बाबा का निधन हो गया। उन्हें लंबे समय से सांस लेने में परेशानी थी। रविवार सुबह उन्होंने उत्तर […] The post हल्द्वानी की रामलीला में पिछले 50 सालों से रावण मेघनाथ कुम्भकरण के पुतले बनाने वाले शम्भू बाबा इस नश्वर संसार से विदा appeared first on Khabar Sansar News.

Mar 23, 2026 - 09:53
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हल्द्वानी की रामलीला के मशहूर कलाकार शम्भू बाबा का निधन, 50 वर्षों तक बनाए रावण के पुतले

हल्द्वानी की रामलीला के मशहूर कलाकार शम्भू बाबा का निधन, 50 वर्षों तक बनाए रावण के पुतले

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कम शब्दों में कहें तो, हल्द्वानी की रामलीला में पिछले पांच दशक से रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले बनाने वाले शम्भू बाबा इस नश्वर संसार को छोड़कर चले गए। यह घटना रामलीला प्रेमियों के लिए एक गहरा आघात है।

हल्द्वानी, उत्तराखंड: प्रसिद्ध रामलीला कलाकार शम्भू बाबा, जिन्हें पिछले 50 वर्षों से दशहरा उत्सव को भव्य बनाने का श्रेय दिया जाता रहा, का निधन हो गया। उन्होंने रविवार को उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित अपने आश्रम में अंतिम सांस ली। उनका स्वास्थ्य लंबे समय से खराब था, और सांस लेने में दिक्कत के कारण वे अस्पताल में भर्ती थे।

शम्भू बाबा ने अपने जीवन में रामलीला के दौरान रावण, मेघनाथ और कुंभकरण जैसे पात्रों के पुतले बनाकर लाखों लोगों का मनोरंजन किया। उनकी कला ने भारतीय संस्कृति की एक अनमोल धरोहर को भव्यता प्रदान की। बाबा का असली निवास स्थान बरेली के बहेड़ी स्थित एक गांव में था, लेकिन वे हर वर्ष दशहरा जैसे बड़े कार्यक्रमों के लिए अपनी टीम के साथ हल्द्वानी आते थे।

शम्भू बाबा का जीवन और योगदान

शम्भू बाबा का संबंध श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा, बागेश्वर से था। उन्होंने जीवन भर तपस्विता का पालन किया और ताउम्र ब्रह्मचर्य का पालन किया। उनके अच्छे व्यवहार और कला कौशल्य ने उन्हें समाज में विशेष स्थान दिलाया।

रामलीला संचालन समिति के सदस्य तनुज गुप्ता ने बाबा के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शम्भू बाबा ने जिस तरह से संस्कृति की सेवा की, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। उनके योगदान से रामलीला के प्रति लोगों में जो प्रेम जागृत हुआ, वह अद्वितीय था।

रामलीला के प्रति समर्पण

रामलीला आयोजन समिति ने शम्भू बाबा की कमी को महसूस करते हुए कहा कि उनके बिना यह उत्सव अधूरा लगेगा। शम्भू बाबा की पुतले बनाने की कला ने दशहरे को एक खास रंग और समृद्धि दी। उनकी कला को आगे बढ़ाने का कार्य अब उनकी टीम को करना होगा।

निष्कर्ष

शम्भू बाबा का निधन हर रामलीला प्रेमी के लिए एक बड़ी क्षति है। उनकी कला और परंपरा को आगे बढ़ाना सभी की जिम्मेदारी है। उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए, हम उनके योगदान को हमेशा याद रखेंगे। उनके बिना दशहरे का उत्सव कभी पहले जैसा नहीं हो सकेगा।

उनकी स्मृति में, हम सभी से निवेदन करते हैं कि रामलीला की उस परंपरा को जीवित रखने के लिए आगे आएं। उनकी आत्मा को शांति मिले।

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यह लेख टीम PWC न्यूज़ की ओर से लिखा गया है।

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