खेतीखान में धरने का आगाज, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के स्मृति स्थल की राशि स्थानांतरित करने से क्षेत्र में रोष

खेतीखान/चम्पावत। काली कुमाऊं के शेर के नाम से विख्यात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित हर्षदेव ओली की जन्मभूमि खेतीखान में शुक्रवार

Jul 18, 2026 - 09:53
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खेतीखान में धरने का आगाज, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के स्मृति स्थल की राशि स्थानांतरित करने से क्षेत्र में रोष

खेतीखान में अनिश्चितकालीन धरना शुरू, स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति नाराजगी व्यक्त

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कम शब्दों में कहें तो, खेतीखान में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की स्मृति स्थल को स्थानांतरित करने के लिए क्षेत्रवासियों ने आंदोलन शुरू किया है। इस धरने का शुभारंभ पहले स्वतंत्रता सेनानी पंडित हर्षदेव ओली की जन्मभूमि पर हुआ।

धरने की शुरुआत

खेतीखान, चम्पावत। शुक्रवार को काली कुमाऊं के शेर कहे जाने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित हर्षदेव ओली की जन्मभूमि खेतीखान में लोगों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। इंदिरा पार्क में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर इस धरने की शुरुआत की गई। इस मौके पर क्षेत्र के कई लोगों ने एकत्रित होकर अपने-अपने विचार साझा किए।

आंदोलन का कारण

धरने में शामिल लोगों ने बताया कि सरकार द्वारा स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति स्थल की राशि को स्थानांतरित करने का निर्णय न केवल अन्याय है, बल्कि यह उन महान हस्तियों के प्रति भी अपमान है जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए संघर्ष किया। क्षेत्रवासियों का कहना है कि अगर यह राशि स्थानांतरित की गई तो इससे स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति के प्रति अनादर होगा।

स्थानीय नेता भी शामिल

धरने में स्थानीय नेता और समाजसेवी भी शामिल हुए, जिन्होंने इस मुद्दे पर गहरा असंतोष प्रकट किया। उन्होंने कहा कि यह धरना तब तक जारी रहेगा जब तक प्रशासन इस मामले पर ठोस कार्रवाई नहीं करता। स्थानीय लोगों ने मीडिया के सामने अपनी बात रखी और पूरा ध्यान इस समस्या पर केंद्रित करने का आह्वान किया।

क्षेत्रवासियों की एकजुटता

धरने में शामिल कई युवाओं ने भी आवाज उठाई और कहा कि दमनकारी नीतियों के खिलाफ संगठित होकर लड़ाई लड़ी जाएगी। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता।

इस धरने की सूचना फैलने के बाद, आसपास के अन्य क्षेत्रों से भी लोग समर्थन देने पहुंचे। बताया जा रहा है कि प्रशासन ने इस पर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है, जिससे क्षेत्र में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

निष्कर्ष

खेतीखान का यह धरना न केवल स्वतंत्रता सेनानियों की याद में हो रहा है, बल्कि यह आज की युवा पीढ़ी के लिए भी एक संदेश है कि वे अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं। क्षेत्रवासियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे स्वतंत्रता सेनानियों की गरिमा को इस प्रकार मटियामेट नहीं होने देंगे और अपने हक के लिए लड़ाई जारी रखेंगे।

इस आंदोलन पर नजर रखने के लिए जुड़े रहें, और अधिक अपडेट के लिए यहां क्लिक करें.

सादर, टीम PWC न्यूज

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