दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल को नोटिस जारी किया, सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारण पर सख्त कार्रवाई

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोशल मीडिया पर अदालत की कार्यवाही से जुड़े वीडियो प्रसारित किए जाने को लेकर सख्त रुख अपनाया है। इस मामले में आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल को नोटिस जारी किया गया है। कोर्ट ने फेसबुक, गूगल और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा […] The post दिल्ली हाईकोर्ट एक्शन में, केजरीवाल समेत कई लोगों को नोटिस जारी appeared first on Khabar Sansar News.

Apr 24, 2026 - 09:53
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दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल को नोटिस जारी किया, सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारण पर सख्त कार्रवाई

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कम शब्दों में कहें तो, दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोशल मीडिया पर अदालत की कार्यवाही से संबंधित वीडियो को प्रसारित करने के मामले में आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल समेत कई लोगों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने इस कार्रवाई से साफ कर दिया है कि न्यायपालिका की गरिमा से समझौता नहीं किया जाएगा।

दिल्ली हाईकोर्ट का सख्त रुख

दिल्ली उच्च न्यायालय ने हाल ही में सोशल मीडिया पर अदालत की कार्यवाही से जुड़े वीडियो के प्रसारण पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने आदेश देते हुए ये स्पष्ट किया कि न्यायिक कार्यवाही के वीडियो का सार्वजनिक रूप से साझा करना न्यायपालिका की गरिमा को नुकसान पहुँचाता है। इस मामले में, आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल को नोटिस जारी किया गया है। साथ ही, फेसबुक, गूगल और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया गया है कि न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में हुई सुनवाई से संबंधित सभी वीडियो तुरंत हटा दिए जाएं।

अदालत की सख्त टिप्पणी

हाईकोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की सामग्री का प्रसार न्यायिक प्रक्रिया के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। अदालत ने मीडिया और अन्य व्यक्तिगत व्यक्तियों से आग्रह किया है कि वे न्यायालय की कार्यवाही की गरिमा को बनाए रखने के लिए तत्पर रहें।

वीडियो हटाने का आदेश और नोटिस

यह मामला दिल्ली की आबकारी नीति से जुड़ा हुआ है, जिसमें केजरीवाल स्वयं अदालत में पेश होकर अपनी बात रख रहे थे। सुनवाई के दौरान रिकॉर्ड किए गए वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जिसके कारण कोर्ट ने उन सभी वीडियो को हटाने का आदेश दिया। उल्लेखनीय है कि पत्रकार रविश कुमार जैसे व्यक्तियों को भी वीडियो अपलोड करने के आरोप में नोटिस जारी किया गया है।

याचिका और अवमानना की मांग

इस मामले में कुछ अधिवक्ताओं ने एक याचिका दायर की है जिसमें केजरीवाल और अन्य के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अदालत की कार्यवाही को रिकॉर्ड करना और इसे सार्वजनिक करना न्यायिक मर्यादा का उल्लंघन करते हुए न्यायालय की इज्ज़त को प्रभावित करता है।

जज बदलने की मांग खारिज

दिल्ली हाईकोर्ट ने उस याचिका को भी खारिज कर दिया जिसमें केजरीवाल और अन्य द्वारा न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को इस मामले की सुनवाई से हटाने की मांग की गई थी। अदालत ने कहा कि आरोप किसी ठोस साक्ष्य पर आधारित नहीं हैं, और केवल निराधार दावों के जरिए न्यायाधीश की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए हैं।

इस मामले ने दर्शाया है कि उच्च न्यायालय अपने अधिकारों और कार्यप्रणाली की रक्षा में कितनी गंभीरता से कार्य कर रहा है। सख्त टिप्पणियों और आदेशों के माध्यम से, यह संकेत दिया गया है कि न्यायपालिका की गरिमा को बनाए रखना सर्वोपरि है।

अंत में, यह स्पष्ट है कि न्यायालय एक कठोर रुख अपनाते हुए किसी भी प्रकार की अवमानना को बर्दाश्त नहीं करेगा। आगे चलकर, यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मामले में संबंधित लोग क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

इस प्रकार के मामलों में मीडिया की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। मीडिया को चाहिए कि वह अदालत की कार्यवाही का विवरण देने से पहले उसकी गरिमा पर विचार करें। इसके अलावा, अदालत के आदेशों का पालन करना सभी व्यक्तियों की जिम्मेदारी है। सोचने का विषय यह भी है कि क्या सोशल मीडिया पर जानकारी का प्रसार न्यायिक प्रशंसा में बाधा डाल सकता है।

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सादर, टीम PWC न्यूज़ - साक्षी रानी

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